वृंदावन हादसे में जिंदा बचीं लुधियाना की रजिंदर कौर की जिंदगी दूसरी बार इंस्टाग्राम रील ने बचा दी। नाव पलटने के बाद जब वह यमुना में डूबीं, तो उन्हें इंस्टाग्राम पर देखा बाहर निकलने का तरीका याद आ गया। जिसके बाद वह यमुना के गहरे पानी से बाहर निकल आईं।
करीब 10 साल पहले भी उनके घर की रसोई में सिलेंडर को आग लग गई थी। आग फैलने लगी तो फिर रजिंदर कौर को रील याद आ गई। जिसमें बताया गया था कि अगर कपड़ा गीला कर सिलेंडर पर लपेट दो तो उसकी आग बुझाई जा सकती है। उस दिन भी रजिंदर ने सिलेंडर पर गीला तौलिया लपेटा। जिससे अपनी व परिजनों की जान बचाने के साथ घर को भी जलने से बचा लिया। बातचीत में रजिंदर कौर ने कहा कि वह सोशल मीडिया पर नाच-गाने के बजाय अवेयरनेस वाली रील्स ही देखती हैं। जो अच्छी लगती हैं, उसे अपनी सहेलियों और बहू को भी शेयर करती हैं। इसी शौक ने उनकी दूसरी बार जान बचा ली। रजिंदर कौर ने बताया कि उनका छोटा बेटा कनाडा में रहता है। उसको भी 12 मई को कनाडा जाना था। अब यह हादसा हुआ तो वह फिलहाल जाने की स्थिति में नहीं है।
- छह महीने पहले देखी थी पानी में डूबने वाली रील: रजिंदर कौर (60) ने बताया कि वो अकसर धार्मिक यात्राओं पर जाती रहती हैं। अब तक 8 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा कर चुकी हैं। ज्यादातर धार्मिक स्थलों पर नदियों में बोट में सफर करते रहते हैं। इसलिए उनके दिमाग में आया कि अगर कभी नाव डूब गई तो वो अपनी जान कैसे बचा सकते हैं। करीब छह महीने पहले ऐसी ही रील उनके इंस्टाग्राम पर शो हुई। उस रील को बारीकी से देखा। इसके बाद ऐसी पांच से छह रीलें उनके अकाउंट पर शो हुईं। सब में एक ही बात बताई जा रही थी। तो उन्होंने भी ये स्टेप याद कर लिए।
- पानी में डूबने वाली रील्स में बताई ये बातें की फॉलो: रजिंदर कौर ने बताया कि पानी में डूबने से बचाने के लिए जो रील्स देखी थी, उसमें बताई गई एक-एक टिप्स मेरे जेहन में थी। पानी में गिरी तो सबसे पहले अपना मुंह बंद किया। नाक से सांस रोकी और बहुत धीमी गति से सांस ली। दोनों हाथ सीधे कर दिए और उसके बाद पैर चलाने शुरू किए। जिसकी वजह से मैं डूबी नहीं। जब मेरा सिर पानी की सतह पर आया तो मैंने तब हाथ खड़ा किया। पांच से सात मिनट तक पानी के अंदर रहीं। रील्स से मिली टिप्स फॉलो करके मैंने अपने नाक व मुंह से पानी अंदर जाने नहीं दिया, जिसकी वजह से मेरी जान बच गई।
- 20 मिनट तक नाव का कुंडा पकड़कर रखा: रजिंदर कौर ने बताया कि जब एक नाव मेरे करीब आई तो मैंने उस नाव का कुंडा पकड़कर रखा। करीब 20 मिनट तक उस कुंडे को पकड़कर रखा। मेरा वेट ज्यादा था, ऐसे में कुंडा पकड़ा होने के बावजूद मैं बार बार डिप कर रही थीं। जैसे ही मैं डिप कर रही थी फिर से अपना मुंह बंद करके और सांस लेना बंद कर रही थीं और अपने पैर चला रही थीं। इसकी वजह से मैं 20 मिनट तक पानी की सतह पर नाव के कुंड के सहारे बनी रहीं। इसके बाद मुझे बाहर निकाल लिया गया।

