चंडीगढ़: चंडीगढ़ पीजीआई और हिमाचल प्रदेश सरकार ने सारथी प्रोजेक्ट के तहत 800 से ज्यादा स्कूली विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक दौरे का आयोजन किया। इस दौरान हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए विद्यार्थियों को देश के प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल पीजीआईएमईआर के कामकाज के बारे में बताया गया। यह कार्यक्रम 12, 14, 16 और 18 मई 2026 को चार चरणों में आयोजित किया गया। इसमें हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर, बिलासपुर, ऊना, कांगड़ा, चंबा, कुल्लू, सिरमौर, शिमला, सोलन, लाहौल-स्पीति, किन्नौर और मनाली समेत विभिन्न जिलों के 837 विद्यार्थियों और 71 शिक्षकों ने भाग लिया।

विद्यार्थियों को सेवा और जिम्मेदारी का संदेश
पीजीआईएमईआर के डायरेक्टर प्रो. विवेक लाल ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए जरूरी है कि बच्चों को कम उम्र से ही संवेदनशीलता, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक व्यवस्था को करीब से देखते हैं तो उन्हें टीमवर्क, अनुशासन और समाज सेवा के महत्व को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि सारथी प्रोजेक्ट केवल अस्पताल के भीतर मरीजों की सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ऐसी पीढ़ी तैयार करना है जो समाज सेवा और मानवीय मूल्यों को समझे।
चार चरणों में हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम के तहत 12 मई को हमीरपुर, बिलासपुर और ऊना से 221 विद्यार्थी और 36 शिक्षक पहुंचे। 14 मई को कांगड़ा और चंबा से 184 विद्यार्थी और 9 शिक्षक आए। वहीं 16 मई को कुल्लू, सिरमौर, शिमला, किन्नौर और लाहौल-स्पीति से 234 विद्यार्थी और 16 शिक्षक शामिल हुए। 18 मई को मनाली और सोलन से 198 विद्यार्थी और 10 शिक्षक पीजीआई पहुंचे। पीजीआई प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों को अंगदान, नेत्रदान और रक्तदान के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। इंटरैक्टिव सत्रों के जरिए छात्रों को स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया। विद्यार्थियों ने अस्पताल के विभिन्न सेवा क्षेत्रों का दौरा भी किया, जहां उन्होंने डॉक्टरों, नर्सों, प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को मरीजों की सेवा करते देखा।

