चंडीगढ़ में नगर निगम का फर्जी इंस्पेक्टर लोगों से वेंडर लाइसेंस बनाने के लिए 5-6 हजार रुपए वसूल रहा है। वो सरेआम दुकानों पर आता और वसूली करता। इसकी शिकायत टाउन वेंडिंग कमेटी के मेंबर्स ने चंडीगढ़ SSP, डिप्टी कमिश्नर और पुलिस स्टेशन-39 को दी है। शिकायत दिए 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस फर्जी इंस्पेक्टर का अब तक सुराग नहीं जुटा पाई। फर्जी इंस्पेक्टर सेक्टर 41 में ही घूमता हुआ नजर आया है और पुलिस कह रही है कि उन्हें मिल नहीं रहा है। मामले का पता चलते ही नगर निगम कमिश्नर ने SSP कंवरदीप कौर को फोन किया और मामले में सख्त एक्शन लेने के लिए कहा। इसके बाद SSP ने कार्रवाई करते हुए DSP साउथ वेस्ट धीरज कुमार को आरोपी को पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी।
चेहरे पर रूमाल बांध घूम रहा
सेक्टर 42 राधे मार्केट वेंडर मार्केट के प्रधान व चंडीगढ़ टाउन वेंडिंग कमेटी के मेंबर नवनीत चावला और मुकेश गिरी की तरफ से पुलिस को शिकायत दी गई है। चावला ने बताया कि शिकायत दिए 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस की ओर से अभी तक उन्हें एक बार भी नहीं बुलाया गया है। जिस फर्जी इंस्पेक्टर के खिलाफ उन्होंने शिकायत दी थी, वह तो सरेआम सेक्टर 41 में वेरका बूथ के सामने घूमता हुआ देखा गया है और पुलिस कह रही है कि उन्हें मिल नहीं रहा है। पुलिस को उसकी फोटो, जो उसने अपने फर्जी इंस्पेक्टर के आई कार्ड पर लगा रखी थी, वह भी दे दी गई है, फिर भी पुलिस उसे नहीं ढूंढ पा रही है।
5000 में हुआ आईकार्ड का सौदा
जिस फर्जी इंस्पेक्टर पर आरोप लग रहे हैं, उसने मोहम्मद मुनव्वर हुसैन का एक फर्जी आई कार्ड बनाया था। मुनव्वर ने बताया कि आरोपी उसके पास सेक्टर-41 में आया था और उसने खुद को नगर निगम वेंडर सेल का इंस्पेक्टर बताया। उसने कहा कि वह उनका आई कार्ड बनवा देगा और इसके लिए 5,000 रुपए लगेंगे। मुनव्वर को जरूरत थी, इसलिए उसने हामी भर दी और उसी समय 500 रुपए नकद दे दिए, जबकि बाकी 4,500 रुपए बाद में देने थे। आई कार्ड मिलने के बाद जब उसने इसे किसी को दिखाया, तो पता चला कि यह फर्जी है। इसके बाद उसने बाकी पैसे नहीं दिए।
5-6 हजार लेकर बनाता था फर्जी लाइसेंस
मुकेश गिरी ने बताया कि आरोपी पहले वेंडरों से संपर्क करता था और उनके लाइसेंस, चालान और केस से जुड़ी जानकारी बताकर भरोसा जीतता था। इसके बाद वह कहता था कि उनका लाइसेंस पेंडिंग है और 5 से 6 हजार रुपए देकर तुरंत बनवाया जा सकता है।

