नुउक: डेनमार्क इस समय एक अजीब और मुश्किल हालात में फंसा हुआ है। उसका सामना किसी दुश्मन देश से नहीं, बल्कि अपने ही सहयोगी देश अमेरिका से है। राष्ट्रपति ट्रम्प ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कई धमकियां दे चुके हैं।
ग्रीनलैंड आधिकारिक तौर पर डेनमार्क का हिस्सा है और वह भी अमेरिका की तरह NATO मेंबर है। यानी ऐसे हालात पैदा हो गए हैं जहां पर NATO का ही एक मेंबर देश, दूसरे मेंबर देश को मिलिट्री एक्शन की धमकी दे रहा है।
डेनमार्क की ऐसी हालात को लेकर ग्रीस के पूर्व वित्त मंत्री और अर्थशास्त्री यानिस वारोफाकिस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह ग्रीनलैंड के कर्मों का फल है। उन्होंने कहा कि NATO बाहरी दुश्मनों से बचाने के लिए है, लेकिन भीतर के दुश्मनों से हिफाजत के लिए नहीं है।
जब 1974 में NATO के दो मेंबर देशों ग्रीस और तुर्किये के बीच साइप्रस को लेकर जंग के हालात बने थे, तब डेनमार्क ने यह कहा था कि NATO का काम किसी मेंबर देश को दूसरे मेंबर देश से बचाना नहीं है।

