हरियाणा सरकार ने 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों के सदस्य को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। पंजाब चुनाव से पहले सरकार इस मुद्दे पर से फिर से एक्टिव हो गई है। दंगा पीड़ित ऐसे पात्र आवेदकों को उनकी शैक्षणिक और अन्य योग्यताओं के आधार पर हरियाणा कौशल निगम में लेवल वन, लेवल 2 और लेवल 3 के अंतर्गत प्रावधानों के अनुसार नौकरी दी जाएगी। आवेदकों को नौकरी की सुरक्षा दी जाएगी।
हिसार के डीसी ने बताया कि सरकार ने हरियाणा के ऐसे परिवारों को नौकरी देने का निर्णय लिया है जिनके परिवार के सदस्य की 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों में हरियाणा या हरियाणा से बाहर मौत हुई है। नौकरी हरियाणा में ही दी जाएगी।
जिले से संबंधित प्रभावित परिवार 17 दिसंबर शाम 5 बजे तक डीसी कार्यालय में सभी जरूरी दस्तावेज जमा करवा सकते हैं, ताकि सरकार के पास समय पर भेजे जा सकें। बता दें कि 1984 में सिख विरोधी दंगों में प्रदेश में लगभग 20 गुरुद्वारों, 221 मकानों, 154 दुकानों, 67 फैक्ट्रियों, 3 रेल डिब्बों और 85 वाहनों को जला दिया गया था। 1984 में हुए दंगों में अनेक लोगों की जान गई थी।
सरकार ने लिया पुनर्वास का जिम्मा
हरियाणा में इन दंगों में 58 व्यक्ति घायल हुए थे और 121 लोगों की मृत्यु हुई थी। पीड़ित परिवारों की व्यथा सुनने के बाद हरियाणा सरकार ने ऐसे परिवारों के पुनर्वास का जिम्मा लिया है। पीड़ित परिवारों को आपसी सहमति से परिवार के एक सदस्य का नाम तय करना होगा, जिसे उपायुक्त मुख्य सचिव के पास भिजवाएंगे।
पंजाब चुनाव पर पड़ेगा असर
नौकरियां देने के प्रारूप, नियम और शर्तों के बारे में जल्दी ही अधिसूचना जारी की जाएगी। बता दें कि, दिल्ली सरकार ने भी 125 पीड़ित परिवारों के सदस्यों को सरकारी नौकरियों के लिए लेटर जारी किए थे। सरकार के इस कदम से निकटवर्ती राज्य पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

