नई दिल्ली: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि फिलहाल होर्मुज जलमार्ग को बंद करने का कोई इरादा नहीं है। एक दिन पहले जब अमेरिकी हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे तो आशंका जताई जा रही थी कि ईरान होर्मुज को बंद कर सकता है। अगर होर्मुज बंद होता तो कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकते थे। इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल पर दिख सकता था। हालांकि एक्सपर्ट अभी भी मान रहे है कि कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी का जोखिम अभी भी बना हुआ है।
1. ऑयल टैंकर पर हमले: ईरान होर्मुज जलमार्ग को आधिकारिक तौर पर बंद न करे लेकिन वह ऑयल टैंकर्स पर हमले कर सकता है। हाल ही में पर्शियन गल्फ के मुहाने पर तीन जहाजों पर हमला किया भी गया है। इस हमले के बाद टैंकर कंपनियां इस रास्ते से दूर हो रही है।
अगर इजराइल और अमेरिका के साथ चल रही ये जंग लंबी खिंचती है तो इस तरह के हमले आगे भी जारी रह सक ते हैं। इससे शिपिंग कंपनियां उस रास्ते से जाने से डरेंगी और रास्ता तकनीकी रूप से खुला रहने के बावजूद क्रूड की सप्लाई ठप हो जाएगी और कीमतें बढ़ेंगी।
2. इंश्योरेंस और शिपिंग लागत: युद्ध जैसे हालात में समुद्री रास्तों पर जोखिम बढ़ जाता है। इस वजह से कच्चे तेल लाने वाले जहाजों का ‘वॉर रिस्क इंश्योरेंस’ और शिपिंग भाड़ा महंगा हो जाता है। यह बढ़ी हुई लागत अंत में कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर ले जाती है।
3. मार्केट में पैनिक: ग्लोबल मार्केट हमेशा भविष्य की आशंकाओं पर चलता है। जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक कच्चे तेल में तेजी रह सकती हैं।
अब आम लोगों पर इसका असर जानें…
1. भारत में पेट्रोल-डीजल 4-5 रुपए बढ़ सकते हैं..
पेट्रोल डीजल: दिल्ली में पेट्रोल ₹95 लीटर से बढ़कर ₹100 तक पहुंच सकता है। वहीं डीजल ₹88 से बढ़कर ₹92 तक जा सकता है। अन्य शहरों में भी इसी तरह से दाम बढ़ सकते हैं।
पहले जब होर्मुज के बंद होने की खबरें आई थी तब एक्सपर्ट अनुमान लगा रहे थे कि कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। वहीं पेट्रोल 105 रुपए तक पहुंच सकता है।
अब ईरान के विदेश मंत्री के बयान के बाद एक्सपर्ट कच्चे तेल के 100 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगा रहे हैं। इसी आधार पर पेट्रोल-डीजल के रेट अनुमान में भी थोड़ी कमी की गई है।।
भारत अपनी जरूरत का 90% तेल आयात करता है। इसमें से करीब 50% क्रूड होर्मुज के रास्ते आता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ये रास्ता पूरी तरह से या थोड़ा बहुत ब्लॉक करता है, तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई घट जाएगी और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी।

