हरियाणा में विधायकों को सम्मान नहीं मिल रहा है। अफसर उनकी फोन कॉल रिसीव नहीं करते। कार्यक्रमों और सरकारी बैठकों की सूचना नहीं देते। विधायकों की कहीं सुनवाई भी नहीं हो रही। खासकर कांग्रेस के विधायकों की। पिछले 3 महीने में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। विधायक प्रोटोकॉल कमेटी के चेयरमैन रहे मंत्री अनिल विज कहते हैं- विधायक का प्रोटोकॉल सरकार के चीफ सेक्रेटरी (CS) से भी ऊपर होता है।
मनोहर लाल सरकार ने हरियाणा में पहली बार साल 2022 में विधायक प्रोटोकॉल कमेटी बनाई थी। जिसमें तत्कालीन अंबाला सिटी विधायक असीम गोयल को चेयरमैन बनाया गया। उनके बाद कैबिनेट मंत्री अनिल विज चेयरमैन बने। हांसी से भाजपा विधायक विनोद भयाना कमेटी के तीसरे चेयरमैन रहे। अब मार्च 2025 के बाद नायब सैनी सरकार में इस कमेटी का गठन नहीं किया गया।
विधानसभा स्पीकर हरविंद्र कल्याण ने बाकी 15 विधानसभा कमेटियों का गठन तो कर दिया, लेकिन प्रोटोकॉल कमेटी नहीं बनाई। इस कमेटी के जरिए सूबे के सभी 90 विधायक अपनी शिकायतों को रखते थे। ये कमेटी विधायकों के द्वारा अधिकारियों के तिरस्कारपूर्ण व्यवहार व अन्य मामलों की शिकायतों के सुनने का अधिकार रखती थी।
कैबिनेट मंत्री अनिल विज कहते हैं…
विधायक का प्रोटोकॉल मुख्य सचिव से भी ऊपर होता है। जनता के प्रतिनिधि होने के कारण उसे उचित सम्मान मिलना चाहिए, चाहे वह सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का। मैंने अपने विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह सभी विधायकों, मंत्रियों के फोन उठाएं। मैंने प्रोटोकॉल उल्लंघन के मामले में लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।
