चंडीगढ़: हरियाणा की हिसार लोकसभा सीट से टिकट नहीं मिलने से नाराज कुलदीप बिश्नोई की नाराजगी दूर करने की कवायद भाजपा ने शुरू कर दी है। मनाने का जिम्मा खुद मुख्यमंत्री नायब सैनी ने उठाया है। इसी के तहत वह आज दिल्ली स्थित बिश्नोई हाउस में खुद मुख्यमंत्री सैनी कुलदीप बिश्नोई से मिलने पहुंचे। इस मौके पर उनके बेटे और आदमपुर से भाजपा विधायक भव्य बिश्नोई मौजूद हैं। कुलदीप बिश्नोई हिसार सीट से भाजपा की टिकट के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन उनकी जगह पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने निर्दलीय विधायक और नायब सैनी सरकार के कैबिनेट मंत्री रणजीत सिंह चौटाला को टिकट दे दी है।

नाराजगी जाहिर कर चुके कुलदीप
रणजीत सिंह चौटाला की टिकट फाइनल होने के तुरंत बाद ही कुलदीप बिश्नोई और भव्य बिश्नोई ने एक वीडियो जारी कर नाराजगी जाहिर कर दी थी। अब रणजीत चौटाला के प्रचार से दूर रहकर दोनों पिता-पुत्र घर बैठे हुए हैं। आदमपुर में शनिवार को भाजपा की ओर से चुनावी शेड्यूल जारी करने के बाद भी भव्य बिश्नोई रणजीत चौटाला के प्रचार अभियान से गायब दिखे। इतना ही नहीं, कुलदीप बिश्नोई अभी तक रणजीत चौटाला के चुनाव कार्यालय में भी नहीं गए हैं। इससे पहले भी देश की सबसे अमीर महिला सावित्री जिंदल की जॉइनिंग कार्यक्रम में भी बिश्नोई परिवार नहीं पहुंचा था।

2011 में हुई भाजपा में एंट्री
वर्ष 2011 में कुलदीप बिश्नोई की हरियाणा जनहित कांग्रेस के साथ भाजपा ने हरियाणा में गठबंधन कर लिया। दोनों पार्टियों के बीच 45-45 के फॉर्मूले पर समझौता हुआ, जिसके तहत हजकां को विधानसभा की 45 और लोकसभा की 2 सीटें दी जानी थी, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद कुलदीप बिश्नोई अपने हिस्से की दोनों सीटें (हिसार और सिरसा) हार गए।

2016 में हजपा का भाजपा में हुआ विलय
विधानसभा चुनाव आने तक भाजपा ने हजकां के साथ पुराने समझौते के तहत चुनाव लड़ने से मना कर दिया। भाजपा ने हजकां को 25 सीटें और कुलदीप बिश्नोई को डिप्टी सीएम बनाने का प्रस्ताव दिया। कुलदीप बिश्नोई ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसके बाद कुलदीप बिश्नोई ने भाजपा के साथ 3 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया।2014 में भाजपा प्रदेश में पूर्ण बहुमत से आ गई। 2016 में कुलदीप ने हजकां का विलय कांग्रेस में कर लिया। इसके बाद 2022 में कुलदीप ने कांग्रेस में मनमुटाव होने के बाद भाजपा जॉइन कर ली।

