चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को चंडीगढ़ में ट्रिब्यून चौक पर प्रस्तावित फ्लाईओवर केस की सुनवाई की। हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि शहर की विशिष्ट पहचान और स्थापत्य विरासत को ट्रैफिक सुधार के नाम पर कुर्बान नहीं किया जा सकता। अगर एक बार विरासत खत्म हुई, तो चंडीगढ़ की आत्मा भी चली जाएगी। मुख्य न्यायाधीश शील नागू ने सुनवाई के दौरान सवाल किया क्या चंडीगढ़ को यातायात को आसान बनाने के लिए अपने संस्थापक दर्शन और विरासत की बलि देनी चाहिए? पीठ ने यह भी कहा कि यह मामला किसी एक ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि उस मूल तत्व से जुड़ा है, जिसने चंडीगढ़ को देशभर में अलग पहचान दिलाई। सुनवाई के अंत में चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत इस मामले का फैसला बिना देरी के सुनाएगी। हम आज ही निर्णय करेंगे, चाहे जिस भी दिशा में हो।
अगर विरासत चली गई, तो सब कुछ चला जाएगा
चीफ जस्टिस ने कहा कि आपके शहर की विशिष्टता केवल उसकी विरासत की अवधारणा के कारण है। अगर वह चली गई, तो सब कुछ चला जाएगा। सवाल पूछा कि क्या हम ट्रैफिक की भीड़भाड़ के कारण विरासत की अवधारणा का त्याग कर सकते हैं? अगर ऐसा हुआ, तो बिल्डर आएंगे, ऊंची इमारतें बनेंगी और शहर की आत्मा खत्म हो जाएगी।
उन्होंने सवाल पूछा कि अगर एक फ्लाईओवर की अनुमति दी गई तो आगे और स्थानों पर इसकी मांग उठेगी, आज नहीं तो दस साल बाद, बीस या पचास साल बाद, पर क्या आप अपने शहर की विरासत को संरक्षित रखना चाहते हैं या नहीं।
चीफ जस्टिस ने पूछा सवाल- पैदल चलने वालों का क्या होगा
पीठ ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से सतत विकास के सिद्धांत पर विस्तृत तर्क देने को कहा और पूछा कि प्रस्तावित फ्लाईओवर योजनाओं में पैदल चलने वालों की सुरक्षा और सुविधा का क्या प्रावधान है। चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि फ्लाईओवर की इस नई अवधारणा में पैदल चलने वालों की समस्या का समाधान कैसे होगा।
इस पर अदालत को बताया गया कि फ्लाईओवर का प्रस्ताव 114 वर्ग किलोमीटर के मास्टर प्लान जोन का हिस्सा है, जबकि पहले की सिफारिशों में फ्लाईओवर के निर्माण को चंडीगढ़ की दृश्य संरचना के लिए हानिकारक बताया गया था।
एक दिन पूरा शहर फ्लाईओवर बन जाएगा
कार्यवाही के दौरान सीनियर एडवोकेट तनु बेदी ने कहा कि ट्रिब्यून चौक ही नहीं, मनीमाजरा लाइट पॉइंट, रेलवे स्टेशन, मटका चौक और सेक्टर 15 जैसे इलाके भी समान रूप से भीड़भाड़ वाले हैं। अगर यही सोच रही, तो एक दिन पूरा शहर फ्लाईओवर बन जाएगा। बेदी ने कहा कि कोई भी शहर मास्टर प्लान के अनुसार ही विकसित होता है और चंडीगढ़ की पहचान भी उसी पर आधारित है। कुछ लड़ाइयां जीतने के लिए नहीं, बल्कि लड़ने के लिए होती हैं और यह विरासत बचाने की वही लड़ाई है। सुनवाई के अंत में चीफ जस्टिस शील नागू ने कहा कि अदालत इस मामले का फैसला बिना देरी के सुनाएगी। हम आज ही निर्णय करेंगे, चाहे जिस भी दिशा में हो।

