करनाल: करनाल जिले के घरौंडा में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर करीब 6 महीने की गर्भवती महिला का अस्पताल के गेट के बाहर ही गर्भ गिर गया। महिला चेकअप के बाद घर की ओर जा रही थी। महिला जैसे ही दर्द से परेशान होकर चबूतरे पर बैठी, कुछ ही देर में गर्भपात हो गया। बच्चा बाहर आते ही अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही डॉक्टर और नर्स अस्पताल के अंदर से बाहर आए और महिला को प्रसूति गृह में ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे करनाल के सरकारी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
चेकअप के बाद लौटते वक्त बढ़ा दर्द
महिला बिहार के समस्तीपुर जिले के गांव बबईयां की रहने वाली 20 वर्षीय पिंकी पत्नी अमर कुमार है, जो घरौंडा में लक्ष्मी धर्मकांटा के पास किराए के मकान में रहती है। पिंकी करीब 6 महीने की गर्भवती थी और पेट में दर्द की शिकायत के चलते रविवार को परिवार के साथ घरौंडा के सरकारी अस्पताल पहुंची थी। परिजनों के अनुसार, इमरजेंसी में उसे इंजेक्शन लगाया गया और सोमवार को दोबारा अस्पताल आने को कहा गया था। इसके बाद उसे ओपीडी सेक्शन में भेज दिया गया। ओपीडी से लौटते समय जैसे ही वह अस्पताल से बाहर निकली, पेट में तेज दर्द हुआ और वह गेट के बाहर पेड़ के चबूतरे पर बैठ गई।
गेट के बाहर ही हुआ गर्भपात
पिंकी के ससुर रामदयाल ने बताया कि यह उसका पहला बच्चा था। दर्द बढ़ने पर वह अपनी पत्नी मंजू को पिंकी के पास छोड़कर जूस लेने चले गए। जब लौटकर आए तो देखा कि बच्चा बाहर आ चुका था और उसकी हालत गंभीर थी। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत अस्पताल प्रबंधन को सूचना दी। इसके बाद स्टाफ मौके पर पहुंचा और गर्भवती महिला व बच्चे को अंदर ले जाकर लेबर रूम में भर्ती किया गया। वहां उपचार के बाद डॉक्टरों ने महिला को करनाल रेफर कर दिया।
परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की तरफ से लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि संभव है कि कोई गलत दवा दी गई, जिसकी वजह से गर्भपात हुआ। रामदयाल ने कहा कि वे ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं और जो भी अस्पताल स्टाफ बताता है, उसी के अनुसार चलते हैं। अगर समय रहते उचित देखभाल और निगरानी की जाती तो शायद यह स्थिति न बनती।

