हिसार/महेंद्र गोयल: ओशो ध्यान उपवन में आयोजित महासत्संग में हरियाणा व अन्य निकटवर्ती राज्यों से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस महासत्संग में सांसारिक व आध्यात्मिक समृद्धि के रहस्यों का खुलासा करते हुए ओशो अनुज स्वामी शैलेंद्र सरस्वती व मां अमृत प्रिया साधकों से रूबरू हुए। इस दौरान साधकों ने भजनों के माध्यम से आध्यात्मिक माहौल बना दिया। भजन सुनकर श्रद्धालुगण भावविभोर होकर झूमने लगे।
सिरसा रोड पर स्थित ओशो ध्यान उपवन में आयोजित महासत्संग के दौरान ओशो अनुज स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बाहरी व भीतरी समृद्धि के संदर्भ में विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य ने पिछले कुछ दशकों में बहुत तरक्की की है। सुंदर व भव्य इमारतें, आलीशान गाड़िया, मजबूत सड़कें व अन्य संसाधन जुटाकर बाहरी समृद्धि के नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत भीतरी समृद्धि के मामले में मनुष्य पिछड़ता जा रहा है। वह भीतर से डिप्रेशन, अशांति, अराजकता व अवसाद से घिरता जा रहा है। स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने प्रश्न उठाया कि क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हम बाहर से संपन्न, समृद्ध व शक्तिशाली हों और भीतर से शांत और आनंदित हों। उन्होंने बताया कि सतगुरु ओशो ने ऐसी अवधारणा दी है कि जिसे अपनाकर बाहरी व भीतरी संपन्नता व समृद्धि संभव है। उन्होंने कहा कि आज के युग में स्पीड बहुत है। हर इंसान अंधाधुंध दौड़ रहा है लेकिन उसे यह नहीं पता कि आखिर जाना कहा हैं। स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने कहा कि एक तरफ विज्ञान, भौतिकवादिता और असीमित संसाधन हैं और दूसरी और ध्यान, अध्यात्म व शांति है। इसलिए ध्यान व विज्ञान एवं भौतिकवाद व अध्यात्म में समन्वय स्थापित करके चेतना जागृति करनी होगी। चेतना की जागृति से सभी संशय दूर होंगे और सच्चे आनंद की अनुभूति होगी।

इस अवसर पर मां अमृत प्रिया ने प्रेरक कथा सुनाते हुए कहा कि हम सभी ने व्यस्तता का पर्दा अपनाया हुआ है। हम हमेशा कुछ न कुछ करते रहते हैं और बिजी रहते हंै। हमें इस व्यस्तता के पर्दे को हटाना सीखना होगा और जीवन में ठहराव के मायने समझने होंगे। उन्होंने कहा कि मकड़ी के जाले की तरह दिन-रात हमारे विचार चलते रहते हैं। इन विचारों के प्रति भी जागरूक होने की आवश्यकता है। साक्षी भाव को अपनाकर चेतना को स्थिर करना होगा। हम जो भी काम करें पूरी तरह उसी के प्रति चेतन रहें। उन्होंने क्रोध, घृणा, ईर्ष्या व छल, कपट छोड़कर प्रेम, सदभाव व करुणा को अपनाने का आह्वान भी किया। इस दौरान स्वामी संजय ने बताया कि ओशो ध्यान उपवन में 4 फरवरी से 9 फरवरी तक ध्यान शिविर भी आयोजित किया जा रहा है। इस छह दिवसीय ध्यान शिविर के माध्यम से भक्तगण ध्यान के माध्यम से जीवन के विभिन्न आयामों की सहज ही अनुभूति कर पाएंगे। ओशो ध्यान उपवन में महासत्संग के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था भी की गई।

